Friday, February 14, 2014

गजब अंदाज

             
  मुक्तक

जख्म हंसकर वो देते हैं जख्म सिलने नहीं देते।
कत्ल नजरों से करते हैं नजर मिलने नहीं देते।। 
गजब अंदाज है इनका खुदा इनसे बचा हमको—
शिकायत क्या करे कोई जुबां हिलने नहीं देते।।
   
          डा0 सुदेश यादव जख्मी
               कवि/पत्रकार 

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