sudesh zakhmi
Friday, February 28, 2014
प्यार करता हूं मैं तुमसे
मुक्तक
प्यार करता हूं मैं तुमसे मगर मैं कह नहीं सकता।
चाहकर दूर भी तुमसे मगर मैं रह नहीं सकता।।
मैंने माना तू है नदिया,और मैं तो किनारा हूं—
मैं चाहूं भी अगर तो साथ तेरे बह नहीं सकता।।
Friday, February 14, 2014
गजब अंदाज
मुक्तक
जख्म हंसकर वो देते हैं जख्म सिलने नहीं देते।
कत्ल नजरों से करते हैं नजर मिलने नहीं देते।।
गजब अंदाज है इनका खुदा इनसे बचा हमको—
शिकायत क्या करे कोई जुबां हिलने नहीं देते।।
डा0 सुदेश यादव जख्मी
कवि/पत्रकार
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